Ayurveda Doctor Story of Nepal - ADSN

Ayurveda Doctor Story of Nepal - ADSN Information Regarding Story of An Ayurvedic Doctor - Dr.(Ayu)

10/01/2026

श्री सम्पूर्ण सदस्यज्युहरु एवं आयुर्वेद चिकित्सकज्युहरु,


विषय: सदस्यता नविकरण तथा नयाँ सदस्यता सम्बन्धमा |

नेपाल आयुर्वेद चिकित्सक संघको केन्द्रीय समितिको २०८२ पुष २१ गते बसेको बैठकले यस संघको ११औं राष्ट्रिय महाधिवेशन २०८२ चैत २० र २१ गते गर्ने निर्णय गरेको हुनाले आयुर्वेद चिकित्सामा स्नातक उत्तीर्ण गरी नेपाल आयुर्वेद चिकित्सा परिषद् मा दर्ता एवं नविकरण अद्यावधिक गर्नु भएका सम्पूर्ण चिकित्सकहरूलाई नयाँ सदस्यता दर्ता गराउनु हुन अनुरोध गर्दछौं साथै नेपाल आयुर्वेद चिकित्सक संघको विधान २०५४ को परिच्छेद -३ अन्तर्गत सदस्यताको प्रकार बमोजिम साधारण सदस्यले आफ्नो सदस्यता हरेक वर्ष नविकरण गर्नुपर्ने व्यवस्था रहेको विदितै छ । सो अनुसार साधारण सदस्यता लिनु भएका चिकित्सकहरुले २०८२/२०८३ सालसम्मको सदस्यता नविकरण गरी शुल्क जम्मा गरेको प्रमाण सहितको विवरण पठाउनु हुन अनुरोध गरिन्छ |

पुनःश्च: तोकिएको समय भित्र सदस्यता नलिएका वा नविकरण नगरेका चिकित्सकहरुले उम्मेदवारी दर्ता वा महाधिवेशनमा सहभागिताका लागि दाबी गर्न पाइने छैन ।

नयाँ सदस्यता शुल्क: रु.१३५०/- (नयाँ सदस्य प्रवेश शुल्क रु.१००० + १ वर्षको वार्षिक शुल्क रु.३५०)
आजीवन सदस्यता शुल्क: रु.६०००/- (नयाँ सदस्य प्रवेश शुल्क रु.१००० + आजीवन सदस्यता शुल्क रु.५०००/-)
नविकरण शुल्क: रु.३५० का दरले प्रत्यक वर्षको वार्षिक शुल्क तिर्नु पर्नेछ |
नयाँ सदस्यता, सदस्यता नविकरण अन्तिम मिति: २०८२ फागुन मसान्त |
सम्पर्क: ९८४५५४८३४५; ९८४१६०७८८२, adannepal.org@gmail.com, info@adan.org.np
Beneficiary: Nepal Ayurvadic Chikitsak sang
Bank Name: Nepal Bank Limited
Bhedasingh Branch
Kathmandu
Account: 02000100059640000001

09/01/2026
 भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली  #आयुर्वेद अब वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर औपचारिक मान्यता पा चुकी है।  #विश्वस्वास्थ्यसंग...
06/01/2026


भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली #आयुर्वेद अब वैश्विक स्वास्थ्य मंच पर औपचारिक मान्यता पा चुकी है। #विश्वस्वास्थ्यसंगठन (W H O) ने अपने नवीनतम रोग वर्गीकरण सिस्टम (International Classification of Diseases – 11th Revision) में आयुर्वेद, सिद्ध और युनानी चिकित्सा प्रणालियों को विशेष स्थान दिया है। यह कदम भारत के लिए गौरव का क्षण है और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए नया अध्याय खोलता है।

ICD-11 क्या है, इसे आसान भाषा में समझिए—आजकल अस्पतालों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभागों में हर बीमारी को एक खास कोड दिया जाता है। ये कोड दुनिया भर में एक जैसा होता है, ताकि सब जगह डेटा समझने में आसानी हो। इसी काम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बहुत महत्वपूर्ण सिस्टम बनाया है, जिसका नाम है ICD यानी International Classification of Diseases (रोगों का अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण)। अभी जो सबसे नया और इस्तेमाल में आने वाला संस्करण है, वो है ICD-11 – यानी रोगों का 11वां संस्करण।

ICD क्या करता है, इसे सरल शब्दों में जानें: —हर बीमारी, लक्षण, चोट या मौत के कारण को एक यूनिक कोड देता है (जैसे 8A00 या RA00 जैसा)। डॉक्टर मरीज को क्या बीमारी बताते हैं, अस्पताल में रिकॉर्ड कैसे होता है, बीमा क्लेम कैसे होता है – सबमें ये कोड काम आता है। देशों के बीच तुलना आसान हो जाती है – जैसे भारत में कितनी डायबिटीज के मामले हैं, अमेरिका में कितने – सब एक ही भाषा में समझ आता है।

सरकारें स्वास्थ्य नीतियां बनाती हैं, रिसर्च होता है, पैसा कहाँ लगाना है ये तय करने में मदद मिलती है।
पहले ICD-10 इस्तेमाल होता था (1990 के आसपास से), लेकिन अब ICD-11 ज्यादा आधुनिक, डिजिटल फ्रेंडली और ज्यादा बीमारियों को कवर करता है। जनवरी 2022 से ये आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ और हर साल इसमें छोटे-बड़े अपडेट आते रहते हैं।

ICD-11 की सबसे खास विशेषता इसका नया “Traditional Medicine Module-1” है। इस मॉड्यूल में भारत की आयुर्वेद, तमिलनाडु की सिद्ध चिकित्सा, और यूनानी प्रणाली जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मानकीकृत कोडिंग सिस्टम में स्थान मिला है। पहली बार ऐसा हुआ है कि आयुर्वेद में वर्णित रोग, लक्षण व उपचार अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य डेटा का हिस्सा बनेंगे, जिससे निम्न लाभ होगा:—
●पहले सिर्फ आधुनिक (एलोपैथिक) दवाइयों और बीमारियों के कोड थे।
●अब आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली बीमारियों के नाम (जैसे वात रोग, पित्त विकार, कफ आदि पैटर्न) को भी अंतरराष्ट्रीय कोड मिल गया।
●इससे दुनिया भर में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के इलाज का डेटा इकट्ठा करना, रिसर्च करना और तुलना करना आसान हो गया। इसकी मदद से विश्वभर के शोधकर्ता आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर वैज्ञानिक अध्ययन कर सकेंगे।
●वैश्विक जनता को आयुर्वेदिक चिकित्सा पर भरोसा और पहुँच दोनों बढ़ेगी।

भारत सरकार का AYUSH मंत्रालय वर्षों से पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक मानकीकरण पर कार्य कर रहा था। WHO के साथ भारत के तकनीकी सहयोग से यह पहल संभव हुई। इससे न सिर्फ भारतीय चिकित्सा को पहचान मिली है, बल्कि इससे जुड़े वैश्विक शोध, नीति निर्माण और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर खुल गए हैं। आने वाले वर्षों में WHO के डेटा-संग्रह में आयुर्वेदिक रोग वर्गीकरण व उपचार पैटर्न की जानकारी दर्ज होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक काम किया है। उनके “स्थानीय से वैश्विक” दृष्टिकोण ने आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। यह उपलब्धि मोदी सरकार की उस सोच का परिणाम है, जो भारतीय परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर बल देती है। इससे न सिर्फ भारतीय चिकित्सा को पहचान मिली है, बल्कि इससे जुड़े वैश्विक शोध, नीति निर्माण और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर खुल गए हैं। आने वाले वर्षों में WHO के डेटा-संग्रह में आयुर्वेदिक रोग वर्गीकरण व उपचार पैटर्न की जानकारी दर्ज होगी।

संतुलित चिकित्सा की दिशा में WHO नया कदम है ये।आयुर्वेद केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि जीवन दृष्टि सिखाता है — “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं।” WHO द्वारा ICD-11 में इसका स्थान देना इस सिद्धांत की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है — कि स्वास्थ्य केवल शरीर का नहीं, बल्कि मन और आत्मा का भी संतुलन है। जैसा कि एक आयुर्वेद विशेषज्ञ ने कहा —“अब आयुर्वेद सिर्फ भारत की धरोहर नहीं, बल्कि विश्व की साझा स्वास्थ्य विरासत बन चुका है।

”CD-11 में आयुर्वेद को शामिल करना, सिर्फ एक तकनीकी सुधार ही नहीं, बल्कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच पुल है। यह कदम भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक समग्र, टिकाऊ और मानवीय बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। ICD-11, दुनिया की बीमारियों की “आधिकारिक भाषा” है,
2025 अपडेट होने से अब आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी को भी इस भाषा में शामिल कर लिया गया। ये भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि हमारी हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धतियाँ अब वैश्विक स्तर पर मान्यता पा रही हैं।

01/01/2026

भारत सरकारले १०० एमजीभन्दा बढी मात्रा भएको दुखाइ कम गर्ने पेनकिलर औषधि निमेसुलाइडका सबै ओरल औषधिहरूको उत्पादन, बिक्री र वितरणमा प्रतिबन्ध लगाएको छ ।

बढी मात्राले मानव स्वास्थ्यमा जोखिम पुर्याउने भन्दै भारत सरकारले उक्त औषधिहरूको उत्पादन, बिक्री र वितरणमा प्रतिबन्ध लगाएको हो

30/12/2025

Stop online marketing in the name ayurveda treatment, mostly ayurveda pharmacy people.

काठमाडौ  म.न.पा. का मेयर बालेन शाहका पिता एवं आयुर्वेद विभागका पूर्व निर्देशक डा. राम नारायण शाह प्रति हार्दिक श्रद्धाञ्...
01/12/2025

काठमाडौ म.न.पा. का मेयर बालेन शाहका पिता एवं आयुर्वेद विभागका पूर्व निर्देशक डा. राम नारायण शाह प्रति हार्दिक श्रद्धाञ्जली। साथै यस दुःखद घडीमा परिवारजन प्रति हार्दिक समवेदना।

24/11/2025

Ayurvedic Doctor भन्दा बढी AAHA / AHA हरु ले prescription लेखिएको पाईने देश हो नेपाल !

30/10/2025

Congratulations to all who passed NAMC Examination

चार ओटा आर्युवेद औषधि Allopathy doctor ले लेख्ने, हामी चाहिं मुख हेर्ने। के छ बिचार?? Ani euta Stone ko biramilai tetro ...
08/10/2025

चार ओटा आर्युवेद औषधि Allopathy doctor ले लेख्ने, हामी चाहिं मुख हेर्ने। के छ बिचार?? Ani euta Stone ko biramilai tetro medicines OMG....

https://www.facebook.com/share/p/1Rsykt7txc/
07/10/2025

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मानव सभ्यताको विकाससँगै रोगहरूको स्वरूप, उपचार विधिहरू र स्वास्थ्यको परिभाषा निरन्तर परिवर्तन हुँदै आएको छ। अतीतमा मानिस प्राकृतिक वातावरणसँग प्रत्यक्षरूपले जोडिएको थियो, त्यसबेलाको जीवनशैली सरल थियो। रोगहरू पनि प्रायः जीवनशैली तथा वातावरणसँग प्रत्यक्ष सम्बन्धित हुन्थे। त्यस समयमा औषधीय बोटबिरुवा, आयुर्वेद, होमियोप्याथी, योग, प्रार्थना, ध्यान र अन्य प्राकृतिक उपचार प्रणालीहरू मुख्य स्वास्थ्य उपचारका आधार थिए।

बाल बालिकालाई भिटामिन "ए" तथा जुकाको औषधि खुवाउने मिति तय भएको छ। कार्तिक २० र २१ गते
06/10/2025

बाल बालिकालाई भिटामिन "ए" तथा जुकाको औषधि खुवाउने मिति तय भएको छ।
कार्तिक २० र २१ गते

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